ना हो निराश
मनुष्य सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी है।वह किसी भी समस्या का सामना करने में समर्थ है।वह अपनी श्रेष्ठता और सामर्थ को भूल चुका है। अतः उसी सामर्थ को तलाशते हुए उसे जगाने की कोशिस की है।मेरी छोटी सी कविता मनुष्य के निरंतर प्रयासों को प्रेरित करती है। वह मानव को हार न मानने और भूल को सुधार कर पुनः प्रयास करने को प्रेरित करती है।
ना हो निराश, तू कर प्रयास।
गलती से सीख, फिर कर सुधार।
जो कमी रह गयी बांकी, उसे अब पूरा कर पाएगा।
गलती के गहरे गङ्ढे में,तू फिर से ना फंस पाएगा।
तू धीर,वीर संघर्षी है,मुश्किलों से लड़ जाएगा।
गलती से सीखने वाला है,ना रोके से रुक पाएगा।
आज विफलता लगी हाथ,मन-संकल्प को वज्र बना।
तू सूर्य चमकता उज्जवल-सा,जग को जगमग निशि शून्य बना।
सुन अंतरमन की वांणी को,हिम्मत साहस विश्वास जगा।
कर जाएगा पार मुश्किलें, दृढ़ता से निज कदम बढ़ा।
Bahut badiya
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteNice line
ReplyDeleteधन्यवाद मित्र
DeleteNice motivation😍😍
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद🙏
Deleteबहुत प्रभावशाली पंक्ति, नव उमंग जोश से परिपूर्ण।
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार आपका
DeleteKya baat! kya baat! Wah
ReplyDeleteधन्यवाद
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