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सावन की छटा (कविता)

घनघोर घटा मदमस्त महीना इसकी घटा कछु जाए कहीना सुंदर उपवन जग उजियारा मनमोहक मन मोहने वारा  नदी करे कल-कल चहु ऒर झरना झर-झर करते शोर मस्ती से भर जाते मोर पंख फिलाते नाच दिखाते मीठी-मीठी मधु ध्वनि गाते कोयल रसमय गीत सुनाती फुदक-फुदक कर डाली-डाली जन हो जाते भाव विभोर नन्हे बच्चे करते रियाज़ कोयल बनने का करते प्रयास मेढ़क जल में करतब दिखलाता टर-टर कर मन बहलाता नव पल्लव भर जाते डाली जनु बसुधा बैठे ओढ़े हरियाली                             (सोनू शर्मा)

अच्छी शिक्षा

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कर्मशीलता कविता

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इस कविता में निष्क्रिय प्राणियों को कार्यरत होने के लिए प्रेरित किया गया है। लोग अपने काम को भी दूसरों से कराना चाहते है। कार्यशीलता को दर्शाती हुई छोटी-सी यह कविता आपके बीच:

स्वाभिमानी मजदूर

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              ग़रीब हूँ सहाब लाचार नहीं               मजदूर हूँ सहाब बेगार नहीं              रोज लड़ता हूँ अपनी किस्मत से              खरीदने पेटभर खाने के समान को             जूझता हूँ रोज मौसम की मार से              गिर भी जाता हूँ तूफानों की तक़रार से             फिर भी उठता हूँ लड़ने अपनेआप से              क्योंकि मैं चोर नहीं स्वाभिमानी हूँ             सोनू शर्मा For watching rap songs please visit on YouTube Hip Hop Dose channel  by MA king link is given ⬇️ https://www.youtube.com/channel/UC5K5piRC_Y39unfZqMtDvMw

समय परस्तता

अच्छा करो किसी का , तो कोई बात नही होगी, छोटा सा थैंक्यू देंगे लोग,फिर मुलाकात नही होगी। भलायी करोगे सबकी,तो सबके चहेते बन जाओगे, तारीफ़ होगी तुम्हारी,सब कुछ तुम ही नजर आओगे। अगर समय बिगड़ा गलती हो गयी,फिर बबाल होगा, भूल जाएंगे तम्हे तुम गलत होगे,तुम पर सवाल होगा। भूला देंगे तुम्हारे प्यार को , सारा भरोसा टूट जाएगा, अच्छाई बांटने वाला गलती पर,तन्हा छूट जाएगा। रात हुई है आसमा नही टूटा,सूरज फिर जगमगाएग, गलत कहे साथ दे,ऐसा इन्शान बिरला नजर आएगा। भूल जाओ गलती उसकी,बस अच्छाई को याद रखो, साथ निभाओ उसका , उसकी ग़लती में सुधार करो।                     ✍️ Sonu sharma 

दृश्य

इस रचना में दुर्घटना स्थल पर खड़े होकर देखने वाले लोगों पर व्यंग्य किया गया है। जो मदद करने की वजह उसमें भी अपना मनोरंजन देखते है।तथा मानवीय मानसिकता के सिमटने के कारण मनुष्य बहुत ही स्वार्थी और अनेक शंकाओं से ग्रसित हो गया है। साथ ही मैं इन रचना के लिए उपयुक्त शीर्षक चुनना आप पर छोड़ता हूँ। comment करके अवश्य बताएं।                   वो देखने आए है दृश्य                   कैसी होती है दुर्घटना                मदद किसी की करनी नहीं                  बस दूर से ही ताकना।           ये देखने वाले है खड़े होके दूर से             हाथ तक पीड़ित को लगते नहीं               बस खड़े होके फ़ोटो खींचते।         वीडियो बनाते है स्टेटस भी लगते है                खुद सहायता करते नहीं ...

दिखावटी दुनियां

इस कविता में सांसारिक द्वंद को दिखाया है। सब अपने अपने हित साधन के लिए दूसरों को देखते है। किसी को किसी के हित की कोई चिंता नही है। यहां सब लोग अपनी सिद्धि के लिए दिखावे के व्यवहार करते है। झूठ को ही सत्य बना कर पेश किया जाता है। और उससे ही सत्य बना दिया जाता है। आज लोगों में दिखावे की मानो प्रतियोगिता चल रही हो सब लोग अपना जीवन दिखावे में ही नष्ट कर रहे हैं। इससे उनकी स्वाभाविक इच्छाओं का दमन हो जाता है। इसी को इंगित करते हिए यह कविता ' दिखावटी दुनियां ' लिखी गयी है।       झूठी है ये दुनिया यहाँ सब दिखावा हैं।        दिखता नहीं झूठ सत्य बिकता है।         यहाँ सब कुछ एक छलावा है।       इस झूठे संसार में सब सजावटी है।         जो सुंदर है वह बनावटी है।          सबके चहेरे पर मुखोटा है।    किसी का मन खोटा है किसी का दिल छोटा है।         यहाँ सब दिखावे के परिणाम हैं।           सबसे बड़ा झूठ जिसका        स...

ना हो निराश

मनुष्य सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी है।वह किसी भी समस्या का सामना करने में समर्थ है।वह अपनी श्रेष्ठता और सामर्थ को भूल चुका है। अतः उसी सामर्थ को तलाशते हुए उसे जगाने की कोशिस की है।मेरी छोटी सी कविता मनुष्य के निरंतर प्रयासों को प्रेरित करती है। वह मानव को हार न मानने और भूल को सुधार कर पुनः प्रयास करने को प्रेरित करती है। ना हो निराश, तू कर प्रयास। गलती से सीख, फिर कर सुधार। जो कमी रह गयी बांकी, उसे अब पूरा कर पाएगा। गलती के गहरे गङ्ढे में,तू फिर से ना फंस पाएगा। तू धीर,वीर संघर्षी है,मुश्किलों से लड़ जाएगा। गलती से सीखने वाला है,ना रोके से रुक पाएगा। आज विफलता लगी हाथ,मन-संकल्प को वज्र बना। तू सूर्य चमकता उज्जवल-सा,जग को जगमग निशि शून्य बना। सुन अंतरमन की वांणी को,हिम्मत साहस विश्वास जगा। कर जाएगा पार मुश्किलें, दृढ़ता से निज कदम बढ़ा।